Zindagi Alone Shayari 2023

चल मेरे हमनशीं अब कहीं और चल, इस चमन में अब अपना गुजारा नहीं, बात होती गुलों तक तो सह लेते हम, अब काँटों पे भी हक हमारा नहीं।

तलाश उसकी करो जो किसी के पास न हो, भुला दो उसे जिस पर विश्वास न हो, हम तो अपने ग़मों पर भी हँस पड़ते हैं, वो इसलिए कि सामने वाला उदास न हो।

एक ये ख्वाहिश के कोई ज़ख्म न देखे दिल का, एक ये हसरत कि कोई देखने वाला तो होता।

रुसवा कर के निकला तेरे शहर वालों ने मगर, तू अब भी यही सोंच, मैं तुझे छोड़ आया।

सिर्फ चेहरे की उदासी से भर आये तेरी आँखों में आँसू, मेरे दिल का क्या आलम है ये तो तू अभी जानता ही नहीं।

उसे जाने की जल्दी थी तो मैं आँखों ही आँखों में, जहाँ तक छोड़ सकता था वहाँ तक छोड़ आया हूँ।

कोई आदत, कोई बात, या सिर्फ मेरी खामोशी, कभी तो, कुछ तो, उसे भी याद आता होगा।